Connect with us

ज़रा हटके

Shaadi.com ने अपनी वेबसाइट से हटाया स्किन फिल्टर ऑप्शन

Published

on

Shaadi

कई दिनों से लोगो की आलोचना के बाद  मेट्रीमोनियल वेबसाइट शादी. कॉम ने अपने वेबसाइट से स्किन कलर का ऑप्शन हटा दिया। एक न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक मैट्रिमोनियल साइट शादी. कॉम ने अपना स्क्रीन फिल्टर हटा दिया जिसके तहत लोग स्किन टोन के आधार पर अपने लाइफ पार्टनर को चुनते थे। दरअसल यूएस में रहने वाली  एक लड़की हेतल लखानी द्वारा ऑनलाइन याचिका शुरू की गई इसके बाद इस वेबसाइट ने यह कदम उठाया।

 

इस इस विषय में shaadi.com ने बात करते हुए कहा की या एक प्रोडक्ट डेब्रिस था, जो हम हटाना भूल गए थे और  इस ऑप्शन का इस्तेमाल किसी के भी उद्देश्य की पूर्ती के लिए नहीं किया जा रहा था।  कॉम्प्लेक्शन फिल्टर को हटाने के पीछे सिर्फ एक ही कारण है कि नस्लवाद और रंगभेद को बढ़ावा ना देना।

 

वहीं इस याचिका को शुरू करने वाली हेतल कहती है कि दक्षिण एशियाई समुदाय के बीच अभी भी गोरे और काले लोगों को लेकर लोग बहुत भेदभाव करते है।  हेतल की इस याचिका पर 1,600 से अधिक लोगों ने साइन किया है। आगे हेतल ने लिखती है कि शादी.कॉम पर एक कलर फिल्टर है, जो यूजर से उनकी त्वचा के रंग की जानकारी लेता है और इसके आधार पर लोगों के लिए सही पार्टनर की तलाश करता है।

उन्होंने ने बताया कि हम सभी चाहते है कि शादी. कॉम अपनी वेबसाइट से स्किन कलर फिल्टर को हमेशा के लिए हटा ले ताकि लोग त्वचा के रंग के आधार पर अपने पार्टनर का चुनाव न करें। हेतल लखानी के मन में याचिका शुरू करने का खयाल उस वक्त आया जब उन्होंने मेघना नागपाल नाम की एक महिला का फेसबुक पोस्ट देखा, जो शादी.कॉम का इस्तेमाल कर रही थीं।

दुनियाभर में रंगभेद के मुद्दे पर हमेशा से बात होती आई है लेकिन यह मुद्दा एक बार फिर लोगो ले बीच तब सामने आया जब यूएस में जॉर्ज फ्लोइड की मौत के बाद लोगों ने रंगभेद को लेकर विरोध करना शुरू किया।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

उत्तर प्रदेश

राजधर्म के आगे, पिता के दाह संस्कार में भी नहीं शामिल होगें यूपी के सीएम

Published

on

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी का बेहतर उदाहरण देते हुए यह साबित कर दिया है कि राजा के प्रति जनता का और जनता के प्रति राजा का कैसा रवैया होना चाहिए। प्रदेश की 33 करोड़ जनता के लिए माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हुए।

रामायण के मुख्य पात्र और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम भगवान की तरह ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने अपनी प्रजा के लिए अपना घर, परिवार सब कुछ तो पहले ही त्याग दिया था। और अब जब उनके पिता ने अंतिम सांसे ली तो उनके अंतिम यात्रा में भी नहीं शामिल हो सके। और एक चिठ्ठी लिखकर अपना पिता प्रेम तो व्यक्त किया। लेकिन राज धर्म के आगे उन्होने अपनी 33 करोड़ प्रजा को ही अपना घर परिवार समझा। साथ ही उन्होंने चिठ्ठी में यह भी लिखा कि लॉकडॉउन का पालन करते हुए पिता जी का दाह संस्कार किया जाए, और कम से कम लोग अंतिम यात्रा में शामिल हो ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट के निधन पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रेमचंद्र अग्रवाल ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। उन्‍होंने ने शोक संदेश में कहा है कि दुखी परिवार एवं क्षेत्रवासियों को ईश्वर इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के पिता आंनद बिष्ठ ने दिल्ली स्थिति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIMS) में अंतिम सांसे ली। मार्च से ही स्वर्गीय श्री आंनद बिष्ठ जी ऐम्स में भर्ती थे। आज उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव पंचूर ( ठागर) में गंगा के किनारे किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर शोमवार की शाम करीब 7 बजे ही पहुंच गया था।
आपको माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की यह चिट्ठी ज़रूर पढ़नी चाहिए

 

Continue Reading

ज़रा हटके

होली 2020: एक प्रतीकात्मक परंपरा और आनंदमयी उत्सव का संगम

Published

on

Happy-Holi-2020

भारतीय संस्कृति में कई ऐसे त्योहार हैं जिनके पीछे अपनी एक कहानी है, होली का त्योहार अवसर है अपनी समस्त नकारात्मक ऊर्जा को होली की आग में जला कर अगले दिन भांति भांति के रंगों से सकारात्मकता से खुद को रंग देने का। होली का उत्सव फाल्गुन मास की पूर्णिमा को भारत में कई सदियों से मनाया जाता रहा है, यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इसके पीछे निरंकुश राक्षस राजा हिरण्यकश्यप और उसके पुत्र प्रहलाद की कहानी है।

राजा हिरण्यकशप ने अपनी प्रजा को यह आदेश दिया की वे सभी राजा को देवता स्वरूप मान कर उसकी पूजा करेंगे परंतु राजा का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु की पूजा में लीन रहता था, कई प्रयासों के बाद भी वह अपने पिता की भक्ति करना स्वीकार नहीं करता था। इस बात से अप्रसन्न होकर राजा ने अपने ही पुत्र को मारने का निर्णय लिया और अपनी बहिन होलिका से सहायता लेकर प्रहलाद को अग्नि में जलाकर मारने का निश्चय किया। चूंकि होलिका को एक वरदान प्राप्त था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती, वह अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी। भगवान विष्णु कि कृपा से प्रहलाद पूरी तरह सुरक्षित रहा और होलिका जलकर भस्म हो गयी। यही कहानी है अच्छाई की बुराई पर विजय की।

साथ ही होलिका दहन के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है वो यह की लकड़ियों और गोबर के उपलों से बनाई गयी होली को दहन करने से ऋतु परिवर्तन से होने वाले संक्रमण से वातावरण शुद्ध हो जाता है। कुछ लोग इस अग्नि के कोयले को अपने घर में लाकर उसका धूप घर के कोने कोने में देते हैं जिससे घर भी शुद्ध हो जाता है। होलिका दहन प्रतीक है सभी नकारात्मक भावों को नष्ट करके आत्मा को पवित्र करने का। अगले दिन सफ़ेद वस्त्र (पवित्रता का प्रतीक) धारण कर स्वयं और दूसरों को विभिन्न रंगों जो कि सकारात्मक भावों जैसे शांति, खुशहाली, सौहार्द आदि का प्रतीक हैं, से रंगा जाता है।

होली भारत में प्रत्येक आयु वर्ग द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है विशेषकर बच्चे इस त्योहार का बेहद आनंद उठाते हैं। यह दो दिन का त्योहार होता है पहले दिन होलिका दहन और अगले दिन धुलन्डी। होलिका दहन के लिए सूखी लकड़ियों और गोबर के उपलों से होलिका तैयार की जाती है उसकी पूजा की जाती है और शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है और अग्नि की प्रदक्षिणा की जाती है। अगले दिन रंगो से होली खेली जाती है। एक दूसरे को रंग लगाकर, रंग भरे पानी के गुब्बारे और पिचकारियों से जमकर होली का आनंद लिया जाता है और साथ ही गुजिया और ठंडाई के भी मजे लिए जाते हैं। कई स्थानों पर आजकल होली पार्टी का आयोजन किया जाता है जहां धूमधाम से नाच गाना भी किया जाता है।

होली वैसे तो मन को प्रफुल्लित कर देने वाला पर्व है मगर पर्यावरण और स्वयं को इस अति उत्साह भरे माहौल में सुरक्षित रखना भी अनिवार्य है। सावधानी के तौर पर हर्बल और ओरगेनिक रंगों का इस्तेमाल किया जाना सही है।

होली पर होने वाले पानी के प्रयोग को सीमित किया जाना भी अनिवार्य है। अपने ही देश में निर्मित पिचकारियों और रंगों का प्रयोग किया जाना बेहतर विकल्प है। उपर्युक्त छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर हम अपने और अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के साथ साथ होली के इस आनंदमयी उत्सव का भरपूर आनंद उठा सकते हैं।

 

 

 

Continue Reading

ज़रा हटके

आखिर क्यों मानते है 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस।

Published

on

international-womens-day-

आज पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। हर 8 मार्च को सम्पूर्ण विश्व की महिलाएं अनेक देश, जात-पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं।

जहां भारत में पहले महिलाएं अपने हक में कम ही बोलती थी, वहीं आज इक्कीसवीं सदी की स्त्री ने स्वयं की शक्ति को पहचान लिया है और काफी हद तक अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीख लिया है। आज की महिलाओं ने ये साबित कर दिया है कि वह हर क्षेत्र में अपना नाम बनाने में सक्षम है।

हम हर साल 8 मार्च को अंतरराषट्रीय महिला दिवस मानते है और अक्सर पूछा भी जाता है आखिर क्यों 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। दरअसल, क्लारा ज़ेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई तारीख पक्की नहीं की थी। साल 1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने ‘ब्रेड एंड पीस’ की मांग की।

महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और आने वाली सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया। उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था। जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी, वह तारीख 23 फरवरी थी।

ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा। कई देशों में इस दिन महिलाओं के सम्मान में छु्ट्टी दी जाती है और कई सारे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

रूस और दूसरे कई देशों में इस दिन के आस-पास फूलों की कीमत काफी बढ़ जाती है। इस दौरान महिला और पुरुष एक-दूसरे को फूल देते हैं।।चीन में ज्यादातर ऑफिस में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है। वहीं अमरीका में मार्च का महीना ‘विमेन्स हिस्ट्री मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है।

भारत में लंबे समय से आठ मार्च की जगह 10 मार्च को भारतीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसके पीछे एक खास वजह है। दरअसल इस दिन 19वीं सदी में स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल या विधवा-विवाह जैसी कुरीतियों पर आवाज उठाने वाली देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले का स्मृति दिवस होता है। इस कारण भारत में महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है।

Continue Reading

Most Popular