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राज्य

केरल में ऑनलाइन चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट का भंडाफोड़

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जगह-जगह पर COVID-19 लॉकडाउन के साथ, केरल राज्य में चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखने वालों की संख्या में भारी वृद्धि देखी है। केरल पुलिस की काउंटरिंग चाइल्ड सेक्सुअल शोषण (सीसीएसई) टीम ने शनिवार को ऐसे 300 लोगों की पहचान की।

CCSE टीम के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) मनोज अब्राहम ने कहा कि टीम ने 300 लोगों की पहचान की है , जिन्होंने इंटरनेट का उपयोग करके चाइल्ड पोर्नोग्राफ़िक कंटेंट अपलोड और डाउनलोड की है।

अब्राहम ने कहा कि इंटरनेट पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों ने महामारी की स्थिति का फायदा उठाने के लिए शिकारियों के लिए एक “सही अवसर” बनाया है।

“पीडोफाइल्स को उन बच्चों को लक्षित करना आसान लगता है , जो ऑनलाइन अधिक समय बिता रहे हैं और लॉकडाउन के कारण अकेला या चिंतित हैं। कई ऑनलाइन चैट रूम में, इस तरह की सामग्री की मांग काफी बढ़ गई है,” उन्होंने कहा। “कई बच्चे गेमिंग साइटों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं ताकि घर पर खुद को मनोरंजन के लिए रखा जा सके। हालांकि, बच्चों तक पहुंच पाने के लिए आपराधिक तत्वों द्वारा इन प्लेटफार्मों का फायदा उठाया जा रहा है।”

अब्राहम ने बताया कि देश के विभिन्न इलाकों में वायरस के जरिए वेबकैम को हैक कर पीड़ित बच्चों की सूचना चोरी करने के मामले भी सामने आए हैं। अब्राहम ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी करनी चाहिए ताकि वे ऐसे अपराधों के शिकार न हों।

CCSE टीम ने प्रमुख सोशल मीडिया प्रोवाइडर को कोरोनोवायरस संकट के दौरान सामग्री को मध्यम करने के लिए दी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को सक्रिय करने के लिए कहा है। पुलिस ने कहा कि लोग इस संबंध में उच्च प्रौद्योगिकी अपराध पूछताछ प्रकोष्ठ, साइबरडोम या साइबर प्रकोष्ठ को यथा शीघ्र सूचना दें। पुलिस विज्ञप्ति के मुताबिक, मौजूदा कानून के तहत बाल अश्लील सामग्री को देखना, वितरण करना और जमा करना दंडात्मक अपराध है और दोषी पाए जाने पर पांच साल कारावास और 10 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

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दिल्ली

लॉकडाउन की वजह से लोगों की जा रही है नौकरियां, बेरोजगारी दर बढ़ी

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कोरोना वायरस के संकट से उबरने के लिए देशभर में 14 अप्रैल तक के लिए लगा हुआ है। इस महामारी की वजह से भारत ही नहीं विभिन्न विकसित और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ी चोट पहुंची है। अर्थव्यवस्था ही नहीं सुस्ती हो रही है बल्कि देश में लगे लॉकडाउन की वजह से लोग बेरोजगार हो रहे हैं।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी के सप्ताहिक ट्रैकर सर्वे के अनुसार देश में शहरी बेरोजगार दर 30.09 फ़ीसदी तक हो गई है। जबकि देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 23.4 तक पहुंच गई है। मार्च महीने के मध्य के 8.4 से बढ़कर बेरोजगारी दर 23 फ़ीसदी तक पहुंच गई है।

इतने लोगों को नौकरी से धोना पड़ा हाथ

जैसे – जैसे देश की अर्थव्यवस्था सुस्ती होती जा रही है, ठीक उसी प्रकार लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है। भारत ही नहीं अमेरिका की भी बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की छटनी कर रही हैं। भारत में पिछले दो हफ्तों में कहे 50000000 लोग अपनी नौकरी से हांथ धो बैठे हैं। अगर इस महामारी की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो बेरोजगारी का आंकड़ा और ऊपर जा सकता है। लॉक डाउन की वजह से जरूरी सेवाओं को छोड़कर सभी औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियां बंद हैं। जिसकी वजह से बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों की छटनी कर रही हैं।

‌‌ व्यापार संगठन रहा काफी प्रभावित

कोविड-19 नामक महामारी की वजह से व्यापार संगठन काफी प्रभावित हुआ है। व्यापार संगठन को हजारों करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। लगभग हर बड़ी कंपनियों को इस महामारी जी की वजह से अच्छा – खासा नुकसान उठाना पड़ा है। एक तरफ जहां देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर होती जा रही है तो दूसरी तरफ कोविड-19 से मौत का आंकड़ा बढ़ता ही चला जा रहा है। विश्व भर में इस वायरस के कारण अब तक 55000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 11 से 12 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं।

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उत्तर प्रदेश

मजदूरों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने दिखाई दरियादिली, फ्री में बट रहा है अनाज

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एक तरफ पूरा देश कोरोनावायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। भारत के नागरिक और सरकार मिलकर वायरस से लड़ रही है। लेकिन भारत के गरीब तबके के लोग लॉक डाउन की वजह से दो वक्त की रोटी नहीं खा पा रहे हैं। रोजमर्रा का काम कर खर्च चलाने वाले लोग लॉक डाउन की वजह से घर में भूखे बैठे हैं ।‌ क्योंकि करनी खरीदने के लिए पैसे ही नहीं है असल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गरीबों को मुफ्त में अनाज बांट रही हैं ‌।

लोक डांस प्रभावित ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के 1.65 करोड़ से ज्यादा मजदूरों को 1 अप्रैल बुधवार यानी आज से मुफ्त में राशन देना शुरू कर दिया गया है। वहीं बाकी के बीपीएल कार्ड धारकों को बाकी कार्ड धारकों को पहले की तरह तीन रुपये प्रति किलो चावल और दो रुपये प्रति किलो गेहूं दिया जाएगा। इस वायरस के चलते आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियां ठप है। लॉकडाउन से प्रभावित उत्तर प्रदेश के 9.63 लाख निर्माण श्रमिकों में से प्रत्येक के बैंक खाते में एक हजार रुपये की रकम भेज दी गई है। इन्हें अब तक कुल 96.3 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। इनमें से 1.43 लाख श्रमिकों के खातों में मंगलवार को कुल 14.3 करोड़ रुपये की रकम भेजी गई हैं।

पूरे देश में कोरोनावायरस को लेकर हाई अलर्ट है। आपकी एक गलती पूरे देश को तबाह कर सकती है तो कृपया करके सोशल डिस्टेंसिंह बनाए रखें 14 अप्रैल तक लाइव काम का पालन करें। क्योंकि तबाही के खौफनाक मंजर में तस्वीर और भयावह न हो इसके लिए हम सबको सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करना अति आवश्यक है। लॉक डाउन की स्थिति में भी कुछ लोग धार्मिक सभाएं करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा करना मौत को बुलावा देना है। इस समय पूरे देश को एक सा खड़े़े़े होने जरूरत है। संकट की इस घड़ी से एक साथ मिलकर ही कोरोनावायरस से लड़ना संभव है।

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उत्तर प्रदेश

यूपी के गौतमबुद्ध नगर के डीएम की छुट्टी, सुहास एलआई होंगे नए कलेक्टर

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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गौतबुद्धनगर का दौरा किया। उन्होंने गौतबुद्धनगर के जिलाधिकारी बीएन सिंह से कोरोना की झूठी अफ़वाह फैलने के विषय में जवाब मांगा और उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो मुख्यमंत्री कलेक्टर साहब के ऊपर भड़क गए। यहां तक कि सीएम ने अफसरों से यह तक कह डाला कि अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालना बन्द करिए।

आपको बता दें कि इस वक्त पूरे देश में दहशत का माहौल बना हुआ है। देश में 14 अप्रैल तक लॉक डॉउन लगा हुआ है। ताकि इस महामारी कोविड 19 नामक कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। लॉक डॉउन को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने अपने अधिकारियों को सतर्कता बरतने को कहा था। जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने अफसरों के साथ बैठक की और अफसरों की जमकर क्लास ली। दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा में ब्रिटिश नागरिकों से फैले संक्रमण से बेहद नाराज थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिटिश नागरिकों के संपर्क में आने वाले लोगों को सही जानकारी नहीं दी गई, जिसकी वजह से यह परेशानी उत्पन्न हुई है। इस पर जब जिले के कलेक्टर बीएन सिंह ने जवाब देना चाहा तो प्रमुख सचिव ने उन्हें रोक दिया। इससे गुस्साए डीएम बीएन सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 3 महीने की छुट्टी मांगी है।

उधर बैठक के बाद सूबे की योगी सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए नोएडा के जिलाधिकारी बीएन सिंह को हटाकर उनकी जगह सुहास एलआई को गौतबुद्धनगर का नया जिलाधिकारी बनाया गया है। डीएम बीएन सिंह ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 3 महीने की छुट्टी मांगते हुए लिखा कि कि मैं 18 – 18 घंटे काम कर रहा हूं। और अब मै नोएडा में नहीं रहना चाहता। उनके इस पत्र के बाद उनको हटाकर सुहास एलआई को गौतबुद्धनगर की कमान सौंपी गई है। मुख्यमंत्री की नाराजगी पर डीएम बीएन सिंह ने भी कहा कि अगर 18 -18 घंटे काम करने के बाद भी हालत संभल नहीं रहे हैं तो वह गौतबुद्धनगर में पोस्ट नहीं रहना चाहते। उनके इस जवाब पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें फटकार भी लगाई।

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