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#निर्भय, निर्भया को मिला इंसाफ, दोषियों को हुई फांसी

देश की बेटी निर्भया को आखिरकार 7 साल, 3 महीने 3 दिन बाद इंसाफ मिल ही गया। निर्भया के दोषियों मुकेश, पवन, अक्षय और विनय)  को आज यानी 20 मार्च की सुबह 5:30 बजे फांसी के फंदे पर लटका ही दिया गया।

फांसी पर लटकाए जाने के करीब आधे घंटे बाद चिकित्सकों ने इनकी जांच की और इनकी मौत की पुष्टि कर दी। पवन, अक्षय, विनय और मुकेश को फांसी दिए जाने की खबर तिहाड़ जेल से बाहर आते ही कई लोग खुशी मनाने लगे। तिहाड़ जेल के बाहर जमा लोग एक-दूसरे को मिठाई भी बांटते नजर आए।

निर्भया के दोषियों की फांसी होने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि आज का दिन महिलाओं के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि आखिरकार उनकी बेटी को इंसाफ मिल ही गया। निर्भया के वकील का कहना है कि यह रेयर ऑफ रेयरेस्ट मामला था। इस मामले के दोषियों को आज सजा दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘मुझे पता था कि कई सारे केसों में लोगों को न्याय नहीं मिला है और केस पेंडिंग है। ऐसे में फैसला आने में देरी हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि देर है लेकिन अंधेर नहीं।

आइए आपको सिलसिलेवार से पूरी घटना के बारे में बताते हैं। वर्ष था 2012 तारीख की 17 दिसंबर। सूनसान अंधेरी रात थी। दिल्ली की सड़क पर बस तेजी से दौड़ रही थी। और उस बस में बैठी थी 23 साल की निर्भय बेटी निर्भया। निर्भया उस बस में अपने पुरुष मित्र के साथ थी। उसके पुरुष मित्र को दरिंदों ने बलपूर्वक पीट कर बेहोश कर दिया था । उसके बाद निर्भया के ऊपर दरिंदे टूट पड़े बेटी निर्भया उन दरिंदों से खूब लड़ी । लेकिन उन दरिंदों ने बलपूर्वक निर्भया के साथ बलात्कार किया। बलात्कार के बाद बलात्कारीयों ने  जंग लगी लोहे की रॉड को निर्भया के प्राइवेट पार्ट में डाल दिया। दरिंदों की हैवानियत ने बेटी निर्भया को मौत के घाट उतार दिया। उस बस में निर्भया और उसके दोस्त के अलावा 6 लोग मौजूद थे।
दरिंदों की हैवानियत की वजह से बेटी निर्भया की आंते बाहर निकल आई थी। बेटी निर्भया खून से लथपथ जिंदगी की जंग लड़ रही थी । और फिर उन दरिंदों ने दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर के नजदीक वसंत विहार इलाके में चलती बस से निर्भया को फेंक दिया था।

जैसे ही किसी ने पुलिस को यह खबर दी कि दिल्ली के वसंत विहार इलाके में एक युवती बेहोश खून से लथपथ पड़ी है। मौके पर पहुंचकर दिल्ली पुलिस ने निर्भया को सफदरगंज अस्पताल में पहुंचाया। लेकिन सफदरगंज अस्पताल में निर्भया की हालत में कोई सुधार नहीं आ रहा था इसीलिए निर्भया को सिंगापुर माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन जिंदगी से जंग लड़ते – लड़ते 29 दिसंबर को निर्भया ने रात के करीब सवा दो बजे वहां दम तोड़ दिया था।

पूरे भारत में यह खबर आग की तरह फैल चुकी थी यहां तक कि संसद में भी अगले दिन आरोपियों को मृत्युदंड देने की गूंज उठे लगी थी। मामले के दो दिन बाद पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था । जिसमें एक राम सिंह नाम का बस ड्राइवर भी था उसने अपने गुनाहों को कबूल भी कर लिया था। उसी के बयान दे पर पुलिस ने उसके बाद भाई मुकेश, विनय गुप्ता, और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया था।
मामला कोर्ट में चल ही रहा था कि आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह ने 11 मार्च, 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली। इन 6 आरोपियों में एक आरोपी नाबालिग था। इस जघन्य अपराध में शामिल नाबालिग दोषी को बाल सुधार गृह में तीन साल गुजारने के बाद 20 दिसंबर 2015 को अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया‌। साथ ही उसे कड़ी सुरक्षा के बीच एक गैर सरकारी संगठन की देखरेख में रहने के लिए निर्देशित किया गया। निर्भया कांड के बाद कानून तक में बदलाव किया गया।
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बाकी के बालक दोषियों को दोषी मानते हुए 13 सितंबर 2013 को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन आरोपियों ने फास्ट ट्रैक अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी दिल्ली हाईकोर्ट ने भी  13 मार्च 2014 को निचली अदालत द्वारा चारों बालिग आरोपियों को सुनाई गई मौत की सजा पर मुहर लगा दी। इतना ही नहीं आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी चारों बालिग आरोपियों की मौत की सजा को कायम रखा।
इसके बाद दोषी बचे हुए कानूनी हथकंडे का प्रयोग करने लगे और उन्होंने ऐसे करके करीब 2 से 3 साल बिता दिए। हालांकि आज निर्भया को इंसाफ मिला और दरिंदों को फांसी के फंदे पर लटकाया गया।

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