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बिहार

दिल्ली की लड़ाई खत्म, अब बिहार की बारी, पोस्टर वार जारी

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सभी पार्टियों के चारों खाने चित कर दिए हैं । दिल्ली में हार से बौखलाई भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल के बीच अब बिहार चुनाव को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है ।
बीहर में विधानसभा  चुनाव को लेकर प्रचार – प्रसार शुरू हो गया हैं। पार्टियां एक-दूसरे पर पोस्टर के जरिए तीखा वार कर रही हैं। यानी कुल मिलाकर दिल्ली से शुरू हुई यह लड़ाई  बिहार शिफ्ट हो गई है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल की दिल्ली विधासभा चुनाव में करारी शिकस्त हुई।

बीते 1 महीने से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच तीखी बहस जारी है यह बहस जुबा से नहीं, यह बहस रैलियां करके नहीं, यह बहस पोस्टर के द्वारा हो रही है  । पहले एक पार्टी पोस्टर लगाकर दूसरी पार्टी पर तीखा वार करती है, तो दूसरी पार्टी  पोस्टर में लिखें स्लोगन का जवाब देती है और दूसरी पार्टी पर वार करते हैं मनु भारतीय राजनीति में कॉमेडी का खेल खेला जा रहा है स्लोगन भी मजेदार है पढ़कर लोग हंस पढ़ रहे हैं जाए रे लोकतंत्र लोकतंत्रात्मक चुनाव हो तो ऐसा ही हो इसमें लोग अपने नेता को खुशी से सोच कर, समझ कर चुने किसी के दबाव में आकर न चुने, यही  तो है लोकतंत्र की खासियत।

बिहार में इन  दोनों के बीच  टक्कर

जिस तरह यूपी में बहुजन समाजवादी पार्टी बीएसपी और सपा समाजवादी पार्टी यूपी में टक्कर देती नजर आती हैं ठीक उसी तरह तरह बिहार में आरजेडी और जेडीयू के बीच चुनाव में कड़ी टक्कर होती है हालांकि पहले आरजेडी और जेडीयू ने मिलकर सरकार बनाई थी लेकिन नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जेडीयू ने आरजेडी से गठबंधन तोड़ बीजेपी से जोड़ कर बिहार में सरकार बनाई थी इसीलिए यह दोनों पार्टियां चिर प्रतिद्वंदी है। बिहार में अब ये दल बिहार में दो-दो हाथ के मूड में हैं। इसके लिए राजद और जदयू दोनों ने ही पोस्टर को जरिया बनाया है।
पटना के मुख्य चौराहे पर बुधवार को एक कलरफुल पोस्टर लगाया गया है, जिसमें लालू प्रसाद को गॉगल्स लगाए हीरो की तरह दिखाया गया है और पोस्टर पर लिखा है, ‘लारा फिल्म्स प्रजेंट्स, ठग्स ऑफ बिहार।’ पोस्टर के नीचे लिखा है ‘जरा याद करो वो कहानी पुरानी।’ बीच चौराहे पर लगा यह पोस्टर सबका ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है कुछ लोग पोस्टर को देखकर अपनी हंसी तक भी नहीं रोक पा रहे हैं। इस पोस्टर के बारे में जदयू कि एक मंत्री का कहना है कि पोस्टर किसने लगवाया इसके बारे में पता नहीं लेकिन पोस्टर में जो लिखा है सही लिखा है, 1990 से 2005 तक जिस तरह की परेशानी बिहार की जनता ने झेली है, यह उसी का प्रकटीकरण है।’

इस पोस्टर से पहले आरजेडी ने जदयू के खिलाफ एक पोस्टर निकाला था जिसमें लिखा था नितीश कुमार फिनिश। वहीं एक दूसरे पोस्टर में राजद ने बिहार के नक्शे को तीर से घायल दिखाया, जिससे खून निकल आया है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी, घोटाला, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे कई मामलों पर पोस्टर के जरिए जदयू और राजद ने एक-दूसरे पर तीर चलाए हैं। जाहिर है दोनों ही दलों की तरफ से पोस्टर जारी कर जनता के मूड को भांपने की कोशिश हो रही है ।
दिल्ली चुनावी संघर्ष खत्म होने के बाद अब बिहार में चुनावी संघर्ष शुरू हो गया है। बिहार में इसी वर्ष साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टियों ने कमर कसना शुरू कर दिया है।

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2011 में हुई थी प्रशांत किशोर की पीएम से मुलाकात

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बिहार की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड से निकाले जाने के बाद प्रशांत किशोर अब सियासी ठिकाना खोजने में लगे हुए हैं हालांकि उन्होंने कहा है कि अभी वह किसी भी पार्टी में नहीं शामिल होना चाहते, बल्कि बिहार के विकास के लिए खुद काम करना चाहते हैं।
2014 में इंडिया की जीत में प्रशांत किशोर ने अपना अहम योगदान दिया था । 2014 में जब बीजेपी ने सत्ता में लंबे अंतराल बाद वापसी की थी तो राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अच्छे दिन आएंगे जैसे नारों को गडकर बीजेपी को सत्ता में लाने का काम किया था।

वह साल तक 2011 का और प्रशांत किशोर की उम्र उस समय 33 वर्ष थी 2011 में प्रशांत किशोर की मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई थी। और 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करने लगे। बिहार में जन्मे और पले-बढ़े प्रशांत किशोर ने बाद में यूपी में भी रहकर पढ़ाई की। यूएन में काम करते हुए पीके ने गुजरात में कुपोषण पर एक पेपर प्रकाशित कराया था। तभी उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर पड़ी और धीरे-धीरे प्रशांत किशोर नरेंद्र मोदी के करीब आने लगे।

पीके की कंपनी I-PAC के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर सरकार में लैटरल एंट्री के बड़े पक्षधर थे। उन्होंने ही पीएम मोदी को इसका आइडिया दिया था। सूत्रों ने बताया कि पीके अपनी टीम के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में एक प्रोफेशनल टीम को लीड करना चाहते थे लेकिन उनकी योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। हालांकि, पीएम मोदी ने शुरुआत में इस योजना को लेकर काफी रूचि दिखाई थी। हालांकि बाद में नरेंद्र मोदी कि इसमें रूचि कम हो गई और पीके अपनी टीम के आदमी को प्रधानमंत्री कार्यालय में नहीं रख सके।

प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनावी जीत के लिए कई रणनीतियां बनाई है जिसमें भारतीय जनता पार्टी को सफलता भी मिली है। वहीं बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। कारण बताया जा रहा है कि प्रशांत किशोर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ थे, और वह नहीं चाहते थे कि यह कानून लागू हो जिसको लेकर उन्होंने सरकार पर कई तंज कसे थे । जिससे नाराज नीतीश ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

अभी तक प्रशांत किशोर किसी भी पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो सकते हैं। क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल उनको अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिशें कर रही है ।अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम ते हैं या नहीं।

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बिहार

बिहार में गर्माई है सियासत, जेडीयू ने प्रशांत किशोर और पवन कुमार को किया निष्कासित

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बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है बिहार की सत्ता में काबिज जनता दल यूनाइटेड ने अपने पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और महासचिव पवन वर्मा को निष्कासित कर दिया है। बिहार में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव भी होना है। जेडीयू के लिए इतना बड़ा फैसला चुनाव में जदयू की मुश्किलें बढ़ा सकता है। 

क्यों किया गया निष्कासित

दरअसल बिहार में नागरिकता संशोधन कानून(CAA) और  राष्ट्रीय रजिस्टर सिटिजनशिप (NRC) को लेकर विपक्षी दल का लगातार विरोध जताते रहे हैं। इसी को लेकर जेडीयू  पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एनडीए को समर्थन के कारण उनकी आलोचना करते रहे हैं। प्रशांत किशोर सीएए के मुद्दे पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के स्टैंड की तारीफ भी कर चुके हैं।  कई मौकों पर प्रशांत किशोर ट्वीट करके सीएम नीतीश कुमार पर नागरिकता संशोधन कानून को लेकर तंज कसते दिखे हैं  

प्रशांत किशोर अलग अलग पार्टियों से ताल्लुक रख चुके हैं। उन्होंने 2018 में जदयू का दामन था, उनका यह सफर दो साल तक भी नहीं चल सका और पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया है। 

निष्कासित होने के क्या बोले प्रशांत और पवन

जेडीयू ने जैसे पार्टी के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और महासचिव पवन वर्मा को निष्कासित किया उसके तुरंत बाद ही दोनों ने  सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तंज कसते हुए कहा कि अपका बहुत बहुत धन्यवाद, शुक्रिया  दोनों ने कहा कि हमारी आपको  यही शुभकामनाएं हैं कि आप बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बरकरार रहें। भगवान आपका भला करे। बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बरकरार रहें। भगवान आपका भला करे। 

इसी बीच दिल्ली में भी 9 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने हैं जेडीयू के लिए इतना बड़ा फैसला सरदर्द साबित हो सकता है

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